पुणे न्यूज डेस्क: नीट-यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई ने जांच का दायरा और तेज कर दिया है। गुरुवार को एजुकेशनल कंसल्टेंसी संचालक शुभम खैरनार, निलंबित जूनियर कॉलेज शिक्षिका मनीषा मंधारे, ब्यूटी पार्लर संचालिका मनीषा वाघमारे और लातूर के एक बाल रोग विशेषज्ञ जांच के केंद्र में आ गए। एजेंसी अब पूरे नेटवर्क से जुड़े मनी ट्रेल, डिजिटल फुटप्रिंट्स और संभावित लाभार्थियों की गहन जांच कर रही है।
सीबीआई ने पूछताछ के लिए शुभम खैरनार को पुणे बुलाया है। वहीं, मेडिकल प्रवेश परीक्षा से पहले कथित तौर पर प्रश्न पत्र लीक करने और उसे छात्रों तक पहुंचाने के मामले में मनीषा मंधारे और मनीषा वाघमारे से दोबारा पूछताछ की गई। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर किस तरह लीक हुआ और किन-किन लोगों तक पहुंचाया गया।
इस बीच, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने संसदीय समिति को बताया कि उसके सिस्टम से पेपर लीक होने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि एजेंसी ने स्पष्ट किया कि मामले में अंतिम निष्कर्ष सीबीआई की जांच के बाद ही सामने आएगा। बता दें कि 22 लाख से अधिक छात्रों द्वारा दी गई नीट-यूजी परीक्षा को कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को रद्द कर दिया गया था।
सीबीआई अब लातूर के एक बाल रोग विशेषज्ञ की भूमिका की भी जांच कर रही है। आशंका है कि डॉक्टर ने अपने बच्चे के लिए सेवानिवृत्त केमिस्ट्री लेक्चरर प्रह्लाद विट्ठलराव कुलकर्णी के जरिए लीक प्रश्न पत्र हासिल किया था। जांच एजेंसी का मानना है कि कुलकर्णी इस पूरे रैकेट का अहम कड़ी हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, कई अभिभावकों और बिचौलियों के बीच हुए आर्थिक लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल चैट्स की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।