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दिल्ली हाईकोर्ट की सख्ती: वोडाफोन आइडिया को ब्याज सहित टैक्स रिफंड चुकाने का आदेश

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Posted On:Wednesday, August 26, 2026

दिल्ली हाईकोर्ट ने टैक्स रिफंड की प्रक्रिया को लेकर इनकम टैक्स विभाग को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत का साफ कहना है कि विभाग के कामकाज का तरीका बेहद निराशाजनक तस्वीर पेश कर रहा है। इस सख्त टिप्पणी के साथ ही कोर्ट ने रेवेन्यू विभाग को कड़ा निर्देश दिया है कि वह वोडाफोन आइडिया को 53.09 करोड़ रुपये का रिफंड लागू ब्याज समेत जल्द वापस करे। जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की डिविजन बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि 30 सितंबर 2026 तक हर हाल में यह रकम कंपनी को मिल जानी चाहिए। अगर इस तय तारीख तक पैसा खाते में नहीं पहुंचता है, तो वैधानिक ब्याज के ऊपर विभाग को हर महीने 1% का अतिरिक्त ब्याज देना होगा।

मामला क्या है?

यह पूरा मामला असेसमेंट ईयर 2003-04 से लेकर 2013-14 के बीच के टैक्स रिफंड से जुड़ा है। वोडाफोन आइडिया ने इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल में करीब एक दशक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 के बीच ट्रिब्यूनल ने कंपनी के पक्ष में कई फैसले सुनाए, जिसके आधार पर असेसिंग ऑफिसर ने रिफंड की रकम 53.09 करोड़ रुपये तय की। हालांकि, रिफंड तय होने के बावजूद कंपनी को पैसा नहीं मिला क्योंकि विभाग ने फॉर्म 26B भरने की जिद पकड़ ली थी, जिसका इस्तेमाल ज्यादा काटे गए टीडीएस के रिफंड का दावा करने के लिए होता है।

बिना कानूनी आदेश नहीं रुकेगा रिफंड

जब कंपनी ने फॉर्म जमा किए, तो विभाग ने 924.57 करोड़ रुपये की पुरानी बकाया डिमांड का हवाला देकर अर्जी खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट में विभाग ने खुद माना कि इसमें से 913.66 करोड़ रुपये की वसूली पर पहले ही अलग-अलग अदालतों और अथॉरिटीज ने रोक लगाई हुई है।

हाईकोर्ट ने इस रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया:

  • अपीलेट अथॉरिटी से रिफंड का आदेश आने के बाद वह टैक्सपेयर का पक्का अधिकार बन जाता है।

  • असेसिंग ऑफिसर या सीपीसी अपीलेट आदेश के तहत बने रिफंड को जारी करने से पहले फॉर्म 26B की मांग नहीं कर सकते।

  • बिना सेक्शन 245 के तहत कानूनी आदेश पारित किए कोई भी रिफंड रोका या एडजस्ट नहीं किया जा सकता।

  • सिर्फ किसी बकाया डिमांड या सिस्टर कंपनी के पैन-टैन का बहाना बनाकर पैसा रोकना पूरी तरह गलत है।

टैक्सपेयर्स को मिली बड़ी राहत

टैक्स कंसल्टिंग फर्म एकेएम ग्लोबल के पार्टनर मनीष गर्ग ने इस फैसले को बेहद अहम बताया है। उनके अनुसार, यह फैसला उन मामलों में बहुत काम आएगा जहां पुराने टीडीएस विवाद चल रहे हैं, और अब टैक्सपेयर्स को अपना ही तय पैसा पाने के लिए बेवजह दोबारा लंबी कानूनी लड़ाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।


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