पुणे न्यूज डेस्क: रियल एस्टेट की बढ़ती कीमतों ने आम खरीदार के लिए किफायती घर का सपना और मुश्किल बना दिया है, लेकिन नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि इस माहौल में भी पुणे मिडिल क्लास के लिए राहत देने वाला शहर साबित हो रहा है। मुंबई और बेंगलुरु जहां भारी कीमतों और इन्वेंटरी के दबाव से जूझ रहे हैं, वहीं पुणे का बाज़ार अभी भी संतुलित और जेब के अनुसार माना जा रहा है।
कंपनियों के औसत रियलाइजेशन आंकड़ों से भी तस्वीर साफ होती है। मुंबई और बेंगलुरु में प्रति वर्ग फुट की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जबकि पुणे के डेवलपर्स की औसत कीमतें इन दोनों शहरों की तुलना में काफी कम हैं। इसी वजह से घर खरीदने वालों के लिए पुणे अभी भी एक व्यावहारिक और सस्ता विकल्प बनकर उभर रहा है।
इन्वेंटरी के मामले में भी पुणे की स्थिति मजबूत दिखाई देती है। जहां मुंबई के कुछ प्रतिष्ठित डेवलपर्स को अपनी बची इन्वेंटरी खत्म करने में दो साल से ज्यादा का समय लगेगा, वहीं पुणे के प्रमुख डेवलपर कोल्टे पाटिल के पास सिर्फ 11 महीने की ही इन्वेंटरी बची है। यह इस बात का संकेत है कि पुणे में मांग और आपूर्ति का संतुलन अभी भी स्थिर है और खरीदारों का भरोसा बनाए हुए है।
नई लॉन्चिंग के आंकड़े बताते हैं कि पुणे में मिड-सेगमेंट घरों की ओर डेवलपर्स का रुझान बढ़ा है। जुलाई से सितंबर के बीच 10,000 से ज्यादा नई यूनिटें लॉन्च हुईं, जिनमें सबसे बड़ा हिस्सा मध्यम वर्ग के लिए बनी परियोजनाओं का था। कुल मिलाकर, मुंबई की ऊंची कीमतें और बेंगलुरु की भीड़भाड़ लोगों को पुणे की ओर आकर्षित कर रही हैं, जहां कीमतें, इन्वेंटरी और विकल्प अभी भी संतुलित माने जा रहे हैं।