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गुरुग्राम लैंड डील केस में रॉबर्ट वाड्रा पर पहली बार चार्जशीट, राहुल गांधी ने बताया राजनीतिक साजिश, जानिए पूरा मामला

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Posted On:Friday, July 18, 2025

मुंबई, 18 जुलाई, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। गुरुग्राम लैंड डील केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने पहली बार रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार पर आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों से उनके जीजाजी को परेशान किया जा रहा है और यह चार्जशीट उसी साजिश की एक कड़ी है। उन्होंने लिखा कि वह रॉबर्ट, प्रियंका और उनके बच्चों के साथ मजबूती से खड़े हैं, जो राजनीतिक रूप से प्रेरित बदनामी और उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। राहुल ने भरोसा जताया कि वे लोग गरिमा के साथ इस संघर्ष से गुजरेंगे और अंततः सच की जीत होगी। ED की इस चार्जशीट में रॉबर्ट वाड्रा के अलावा कई अन्य लोगों और कंपनियों के नाम शामिल हैं। इससे पहले 16 जुलाई को एजेंसी ने करीब 37.64 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अटैच किया था। कांग्रेस पार्टी ने इसे एक राजनीतिक प्रतिशोध और डराने की कोशिश बताया।

मामले की शुरुआत फरवरी 2008 में हुई, जब वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से 3.5 एकड़ जमीन 7.5 करोड़ रुपए में खरीदी। उस वक्त हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी और भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री थे। जमीन खरीदने के एक महीने बाद ही हुड्डा सरकार ने स्काईलाइट को 2.7 एकड़ जमीन पर आवासीय परियोजना का लाइसेंस दे दिया, जिससे जमीन की कीमत तेजी से बढ़ गई। इसके मात्र दो महीने बाद ही स्काईलाइट ने वही जमीन DLF को 58 करोड़ रुपए में बेच दी, जिससे कंपनी को लगभग 700 फीसदी का लाभ हुआ। 2012 में हुड्डा सरकार ने कॉलोनी बनाने का लाइसेंस DLF को ट्रांसफर कर दिया।

वर्ष 2012 में हरियाणा सरकार के भूमि पंजीकरण निदेशक अशोक खेमका ने इस सौदे में अनियमितताओं को देखते हुए म्यूटेशन रद्द कर दिया और दावा किया कि लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ था। इसके बाद उनका तबादला कर दिया गया, जिससे मामला और विवादास्पद बन गया। 2018 में हरियाणा पुलिस ने रॉबर्ट वाड्रा, भूपेंद्र हुड्डा, DLF और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज के खिलाफ IPC की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की, जिनमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप शामिल थे। इसके आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। जांच में यह शक जताया गया कि जमीन की कीमतों में हुई असामान्य वृद्धि और लेनदेन में अनियमितताएं मनी लॉन्ड्रिंग का संकेत देती हैं। जांच में यह भी सामने आया कि जमीन की खरीद से जुड़ा चेक कभी जमा नहीं किया गया और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज को फर्जी कंपनी होने का संदेह है। ED इस बात की भी जांच कर रही है कि इस सौदे से हुई आय का इस्तेमाल कहीं अवैध गतिविधियों में तो नहीं किया गया। साथ ही आरोप है कि हुड्डा सरकार ने DLF को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों का उल्लंघन किया, जिसमें वजीराबाद की 350 एकड़ जमीन का आवंटन भी शामिल है। ED को संदेह है कि इससे DLF को करीब 5 हजार करोड़ रुपए का आर्थिक लाभ हुआ।


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