ताजा खबर
2 लाख के कर्ज को लेकर घर पहुंचकर दी धमकी, पनवेल में 11वीं मंजिल से कूदी महिला और उसके दो बच्चे   ||    पुणे पुलिस कमिश्नर के बंगले के गेट से टकराई कॉन्स्टेबल की कार, शराब के नशे में होने का आरोप   ||    ये प्रेम मोल लिया का सांग सावन आया है वायरल हुआ   ||    तब्बू के जन्मदिन पर मिला फैंस को खास तोहफा, किंग 100 से महारानी झांसी के दमदार अवतार में आईं नजर   ||    कनिका कपूर ने बताई दूसरी शादी टूटने की वजह, बोलीं मेरी जिंदगी में कोई तीसरा शख्स नहीं है   ||    सलमान खान के स्वैग से लेकर मृणाल ठाकुर की खूबसूरती तक, रमेश तौरानी की दिवाली पार्टी में सितारों का ल...   ||    सलमान खान का नया गाना तेरी सेक्सी ब्यूटी रिलीज, दो पेग और सुबह की फ्लाइट वाले ट्वीट ने फैंस को किया ...   ||    बोरीवली बस डिपो विवाद: बीएमसी, कानूनी लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप   ||    अमेरिकी मिडटर्म चुनाव और ट्रंप की पार्टी को झटका: राजनीतिक समीकरणों में बदलाव   ||    Gold Price Outlook: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में नरमी, खरीदारों के लिए क्या हैं संकेत?   ||   

रेपो दर में वृद्धि और कड़े मौद्रिक रुख का बैंकिंग व वित्तीय क्षेत्र ने किया समर्थन: मुद्रास्फीति नियंत्रण की दिशा में अहम कदम

Photo Source :

Posted On:Thursday, October 8, 2026

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा रेपो दर को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने और अपने नीतिगत रुख को 'तटस्थ' से 'सख्त' करने के निर्णय का बैंकिंग, वित्तीय क्षेत्र तथा उद्योग जगत ने व्यापक स्वागत किया है। उद्योग विशेषज्ञों और शीर्ष बैंकरों ने इस कदम को बढ़ती मुद्रास्फीति और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच उठाया गया एक संतुलित एवं सोच-समझकर लिया गया फैसला बताया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को मजबूत बनाए रखते हुए कीमतों में स्थिरता लाना प्राथमिकता है।

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन श्रीनिवासुलु शेट्टी ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए यह मौद्रिक सख्ती समय की मांग थी। उद्योग संगठन एसोचैम (ASSOCHAM) और निर्यातकों की संस्था फियो (FIEO) ने भी माना कि लंबे समय में यह नीति अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी। हालांकि, उद्योग प्रतिनिधियों ने संकेत दिया कि ब्याज दरों में इस वृद्धि से नए ऋण और गृह ऋण (Home Loans) महंगे हो सकते हैं, जिससे अल्पावधि में पूंजीगत व्यय और उपभोक्ता मांग पर आंशिक प्रभाव पड़ सकता है।

वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, इस निर्णय के बाद बैंकों द्वारा जमा दरों (FD Rates) और ऋण दरों (Lending Rates) में जल्द ही संशोधन देखने को मिलेगा। अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क में सुधार और एक एकीकृत वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण से जुड़े आरबीआई के अन्य विकासात्मक प्रस्तावों की भी बाजार विशेषज्ञों ने सराहना की है।


पुणे और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



You may also like !

मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. punevocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.