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होर्मुज के बाद मलक्का में टोल बूथ बनाने की चर्चा, भारत पर क्या होगा असर?

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Posted On:Friday, April 24, 2026

दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री रास्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ मलक्का (Strait of Malacca) को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। इंडोनेशिया अब इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 'टोल' या टैक्स लगाने की योजना पर विचार कर रहा है। इंडोनेशिया के वित्त मंत्री पुर्बाया युधि सदेवा के इस बयान ने वैश्विक व्यापारिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
क्यों टैक्स लगाना चाहता है इंडोनेशिया?
इंडोनेशिया का तर्क है कि मलक्का स्ट्रेट की तुलना स्वेज नहर और पनामा नहर जैसे व्यस्त मार्गों से की जाती है, जहाँ जहाजों से शुल्क लिया जाता है। इंडोनेशिया के अनुसार:

  • इस रास्ते से सालाना हजारों जहाज गुजरते हैं, जिससे समुद्री पर्यावरण और सुरक्षा पर दबाव बढ़ता है।
  • इंडोनेशिया खुद को वैश्विक व्यापार में एक 'मजबूत खिलाड़ी' के रूप में स्थापित करना चाहता है और राजस्व के नए स्रोत तलाश रहा है।
सिंगापुर का कड़ा रुख: "रास्ता हमेशा मुफ्त रहना चाहिए"
इंडोनेशिया के इस प्रस्ताव का सिंगापुर ने तुरंत और कड़ा विरोध किया है। सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत इस रास्ते से गुजरना सभी देशों का संप्रभु अधिकार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मलक्का स्ट्रेट का मुफ्त और खुला रहना वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए अनिवार्य है।

भारत के लिए क्यों है यह 'लाइफलाइन'?
अगर इंडोनेशिया अपने इस प्रस्ताव को लागू करने में सफल होता है, तो इसका सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ सकता है। इसकी कुछ मुख्य वजहें हैं:
  • व्यापार का बड़ा हिस्सा: भारत का लगभग 55% से 60% समुद्री व्यापार इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
  • जरूरी सामान की सप्लाई: भारत में आने वाली LNG (गैस), कोयला, इलेक्ट्रॉनिक्स और दवाइयों का कच्चा माल (API) इसी मार्ग से आता है।
  • रणनीतिक स्थिति: भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह इस रास्ते के मुहाने पर स्थित हैं। भारत इस क्षेत्र में अपनी सैन्य और व्यापारिक उपस्थिति लगातार बढ़ा रहा है।
  • लागत में वृद्धि: टोल लगने का सीधा मतलब है कि भारत में आयात होने वाली वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे महंगाई पर दबाव पड़ सकता है।
आगे की राह और चुनौतियां
फिलहाल यह योजना शुरुआती स्तर पर है। अंतरराष्ट्रीय कानून (UNCLOS) के तहत किसी भी जलडमरूमध्य (Strait) पर टोल लगाना इतना आसान नहीं है, क्योंकि इसमें मलेशिया, सिंगापुर और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की सहमति अनिवार्य होगी। शिपिंग कंपनियां भी इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ का पुरजोर विरोध कर सकती हैं।


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